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Showing posts from September, 2025

राजस्थान की भौतिक विशेषताएँ

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राजस्थान की भौतिक विशेषताएँ राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। यहाँ की भौतिक संरचना अत्यंत विविध और विशिष्ट है। मरुस्थल, पर्वतमाला, पठार, मैदान और सीमित नदियाँ इसकी भौगोलिक पहचान हैं। नीचे बिंदुवार राजस्थान की भौतिक विशेषताएँ प्रस्तुत हैं। 1. मरुस्थलीय क्षेत्र (थार मरुस्थल) - राजस्थान का लगभग 60% भाग थार मरुस्थल में स्थित है। - यह पश्चिमी राजस्थान में फैला है। - प्रमुख जिले: जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर। - यहाँ रेत के विशाल टीले, कम वर्षा और अत्यधिक गर्म जलवायु पाई जाती है। 2. अरावली पर्वतमाला - अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला है। - यह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली हुई है। - सर्वोच्च शिखर: गुरु शिखर (माउंट आबू)। - यह राजस्थान को दो भागों में बाँटती है। - अरावली पर्वतमाला का प्रभाव यहाँ की जलवायु और वनस्पति पर भी पड़ता है। 3. मैदान और पठार - अरावली के पूर्वी भाग में मैदान और पठारी क्षेत्र पाए जाते हैं। - प्रमुख मैदान: बनास नदी का मैदान, चंबल बेसिन। - प्रमुख पठार: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान। - इन क्षेत्रों क...

Bahrat परिवार की वीरता – शाहपुरा का गौरव 🌟

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🌟 Bahrat परिवार की वीरता – शाहपुरा का गौरव 🌟 ✍️ रचनाकार – Sanat Sharma अन्तरा 1: शाहपुरा की पावन धरती, वीरों की है खान, जहाँ Bahrat परिवार ने दिखाई अपनी शान। धैर्य, साहस और सत्य से भरा उनका जीवन, संकल्प और समर्पण से जग में किया प्रण॥ अन्तरा 2: रणभूमि में जब उठी विपत्ति की धुन, Bahrat परिवार ने दिखाई अद्भुत शून। हर कठिनाई में न डिगे, न कभी हारे, सत्य और धर्म के लिए सब कुछ त्यागे॥ भजन शैली का कोरस: जय हो, जय हो, Bahrat परिवार, शाहपुरा का अभिमान, जग में अपार। साहस, सच्चाई और प्रेम की मिसाल, Bahrat परिवार का नाम जगाए काल-काल॥ अन्तरा 3: शाहपुरा की गलियों में गूँजे उनका गौरव, साधु-संत भी सुनाएँ उनकी वीरता की दौरव। सहनशीलता और न्याय का अद्भुत संगम, Bahrat परिवार के व्यक्तित्व का पावन रंगम॥ अन्तरा 4: सादगी में भी उनका अनोखा ठाठ, सत्य और धर्म में कभी न टूटा साथ। Bahrat परिवार ने सिखाया जीवन का मंत्र, धैर्य, वीरता और प्रेम से बनता सच्चा केंद्र॥ कोरस दोहराव: जय हो, जय हो, Bahrat परिवार, शाहपुरा का अभिमान, जग में अपार। साहस, सच्चाई और प्रेम की मिसाल, Bahrat परिवार का नाम जगाए काल-काल...

रामस्नेही रामद्वारा शाहपुरा – अन्तरराष्ट्रीय परिवार

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🌸 रामस्नेही रामद्वारा शाहपुरा – अन्तरराष्ट्रीय परिवार 🌸 ✍️ रचनाकार – Sanat Sharma शाहपुरा की पावन धरती, जहाँ गूँजे राम का नाम, रामस्नेही रामद्वारा है, जग में अनुपम धाम। भक्ति की धारा बहती यहाँ, प्रेम से सरिता सी, संतजन जग को दिखलाते, सच्ची मानवता सी॥ दूर-दूर से आते श्रद्धालु, लेकर मन में आस, रामद्वारा की चौखट पर सबको मिलता विश्वास। यहाँ न कोई भेदभाव है, न कोई ऊँच-नीच, समान भाव से मिलता सबको, प्रेम अमृत रस मीच॥ अन्तरराष्ट्रीय परिवार बना है, रामस्नेही की छाँव, विदेशों तक पहुँचा इसका मधुर और पावन ठाँव। लंदन, दुबई, अमेरिका तक, राम नाम गूँजता है, हर दिल में यह संदेश अमर – "राम प्रेम ही सच्चा है॥" शाहपुरा की गलियों में जब, गूँजे राम भजन, तोतनियाँ, नगाड़े बजें, सज जाए हर आँगन। रामद्वारा की आरती का दृश्य बड़ा अलभ्य, जग के कोने-कोने तक पहुँचे इसका संदेश प्रभ्य॥ यहाँ की साधना अनोखी, सरल भक्ति का भाव, हर मानव में दिखता सबको, राम स्वरूप का छाव। ना पाखंड, ना दिखावा, ना कोई बड़ा अहंकार, सिर्फ सादगी और स्नेह यहाँ, यही है सच्चा संस्कार॥ रामस्नेही संतजन कहते – "राम नाम है स...

शाहपुरा री लोक-गाथा

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🎵 शाहपुरा री लोक-गाथा 🎵 (ढोल-नगारों, मांड-सरंगी की लय पर पढ़ें) शाहपुरा री धरती रा, गुण गावे सब गाम, भक्ति औ वीरता रा, जग में छाए नाम। 🎶 ओ हो... शाहपुरा री शान, मेवाड़ री पहचान। 🎶 रामद्वारा मंदिर रो, गूँजे भक्ति-सुर, रामस्नेही संतां रो, अमर भयो हुंकार। 🎶 ओ हो... राम नाम री गूँज, शाहपुरा री पूँज। 🎶 चित्रकला री बाड़ी में, रंगां रो बरसाव, भित्ति चित्रां री छटा, देखे दिल हरखाव। 🎶 ओ हो... रंग-रंगीलो गाव, शाहपुरा रो चाव। 🎶 रण बीच राजपूताना, खड़ग उठायो हाथ, मुगलां सूं टकराई धरती, राख्यो आन औ बात। 🎶 ओ हो... रणबाँकुरो वीर, शाहपुरा रो धीर। 🎶 ढोल-नगारां गूँजया, त्यौहारां री रात, लोकगीतां री तान सूं, झूमे हर इक जात। 🎶 ओ हो... गूंजे राजस्थानी, शाहपुरा रो पानी। 🎶 लेखक Sanat Sharma गावे, सुर में मीठो तान, शाहपुरा री धरती सूं, अमर रहसी पहचान। 🎶 ओ हो... गाथा अमर सुजान, शाहपुरा रो गान। 🎶 👉 Sanat Kumar Sharma 

शाहपुरा री गाथा

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🎶 शाहपुरा री गाथा 🎶 शाहपुरा री धरती पावन, मेवाड़ रो गौरव गावे, इतिहास री परछाई सूं, संस्कृति रो दीप जगावे। 🎵 ओ रे शाहपुरा, ओ रे माटी री शान, भक्ति औ वीरता री, अमर थारी पहचान। 🎵 रामद्वारा मंदिर री गूँज, भक्ति रस री धारा, संतां री तपस्या सूं, जगमग थारो नजारा। रामस्नेही संतां री, छाप अमर संसार, भक्तां रो सहारा बन्यो, थारो पावन द्वार। चित्रकला री छटा न्यारी, रंगां री बरसात, दीवारां पर जीवंत थाए, कथा-पुराण री बात। शाहपुरा रो रंग अनूठो, कला री धरोहर, दुनिया भर में गूंजे नाम, थारी छवि अमर। वीर ठिकाना राजपूतानो, रण बीच थयो बलवान, मुगलां सूं टकराई धरती, रख्यो मेवाड़ रो मान। खून-पसीना अर्पण कियो, धरती रो गौरव गान, वीरां री लहू सूं लिख्यो, अमर गाथा रो प्रमाण। त्यौहारां में रंग झलकतो, लोकगीतां री तान, ढोल-नगारां सूं गूँजतो, राजस्थानी गान। नाच-गान औ मेलां री, रीत पुरानी थारो, संस्कारां री थाली में, मान-सम्मान थारो। ओ शाहपुरा री धरती, तू संस्कृति री खान, भक्ति औ वीरता सूं, जग में करसी पहचान। लेखक Sanat Sharma गावे, थारो अमर गान, जनम-जनम तक गूँजे, शाहपुरा री शान। 🎵

सलेरा कला री गाथा

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🎶 सलेरा कला री गाथा 🎶 (धुन: मेवाड़ी लोकगीत की तरह पढ़ें) सलेरा कला री धरती, अमर गाथा गावे, महाराणा औ शक्तिसिंह, इतिहास उजियावे। 🎵 ओ रणबाँकुरा, ओ मेवाड़ रा लाल, धरती रा आँचल में, थारो नाम अमरकाल। 🎵 जंगल बीच हिरण दौड़तो, शिकार री आहट आई, भाई-भाई री आँखां में, आग औ मान समाई। 🎵 ओ रे रणधीर, ओ रे महाराणा, सच्चो मेवाड़ री शान, थारो ही तराना। 🎵 शक्तिसिंह कहे रोक राणा, भुल कर रा गुस्सां, पर राणा री तलवार बोले, थर्र्या धरती रसां। 🎵 ओ रे धरती माँ, साक्षी थारी थान, भाईचारा रो रंग, थयो अमर पहचान। 🎵 इतिहास लिख्यो सोने री कलम, धरती गुनगान करे, मेवाड़ री माटी आजो, वीरां रो गुण गावे। 🎵 ओ रे शौर्य रा गीत, ओ रे मेवाड़ री शान, जनम-जनम तक गूँजे, वीरता रो गान। 🎵 सलेरा कला री गाथा, लोकगाथा बन गी, वीर राणा औ शक्तिसिंह, अमर ज्योत जगदी। 🎵 ओ वीर राजपूताना, ओ रणबाँकुरा वीर, धरती रो मान थारा, अमर रहसी नीर। 🎵 अंत में प्रणाम करूँ, भाव भरा मनुहार, लेखक Sanat Sharma गावे, मेवाड़ रो श्रृंगार। 🎵 ओ रे अमर गाथा, ओ रे वीरां री शान, मेवाड़ री माटी सूं, अमर रहसी थारो नाम। 🎵

नवरात्रि विशेष,,,माँ चंद्रघंटा की स्तुति

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माँ चंद्रघंटा पर कवि ता ✍️ (Sanat Sharma) सिंह पर आरूढ़ विराजे, स्वर्णिम ज्योति से भरी, दस भुजाओं में शस्त्र सजें, माँ की छवि है अति धरी। माथे पर शोभित अर्धचंद्र, रूप अलौकिक प्यारा, घंटनाद से कांपे जग, मिटे अंधियारा सारा। भय का नाश, साहस की दात्री, शांति का देती वरदान, माँ चंद्रघंटा की उपासना से, पाते श्रद्धालु सम्मान। घंटि की ध्वनि से दूर हो, जीवन का हर संकट, माँ के चरणों में जो झुके, उसको मिले आनंद। नवरात्रि का तीसरा दिन है, भक्तों का उत्सव न्यारा, माँ की कृपा से जग में, होता मंगल सारा।

मेवाड़ के इतिहास में salerakala

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​महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह: एक शिकार से शुरू हुआ विवाद और हल्दीघाटी में भाई का प्यार ​- सनत शर्मा ​मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम साहस, शौर्य और त्याग का पर्याय है। लेकिन उनके जीवन की कहानी सिर्फ युद्धों और संघर्षों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें पारिवारिक रिश्ते और मनमुटाव भी शामिल थे। उनके भाई शक्ति सिंह के साथ उनका रिश्ता काफी जटिल था, जिसकी नींव एक साधारण शिकार की घटना से पड़ी थी। ​सालेरा कलां: जब एक शिकार ने दो भाइयों में दरार पैदा की ​महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह दोनों को बचपन से ही शिकार का शौक था। एक दिन, वे दोनों सालेरा कलां नामक गाँव के पास शिकार के लिए निकले। उन्हें एक सूअर दिखाई दिया, और दोनों ने एक साथ उस पर भाला मारा। सूअर वहीं गिर गया। ​अब विवाद छिड़ गया। दोनों का दावा था कि उनका भाला सबसे पहले लगा था। यह सिर्फ एक शिकार का विवाद नहीं था, बल्कि यह दोनों के बीच मौजूद गहरे मतभेद और उत्तराधिकार के संघर्ष को दर्शाता था। महाराणा प्रताप ने इसे अपने सम्मान पर लिया और क्रोध में आकर शक्ति सिंह को मेवाड़ से बाहर निकाल दिया। ​अपमानित होकर शक्ति सिं...

सलेरा कला का इतिहास

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सलेरा कला का इतिहास : महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह का शिकार प्रसंग सलेरा कला का इतिहास : महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह का शिकार प्रसंग | Mewar History सलेरा कला राजस्थान का वह स्थान है जहाँ महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह में शिकार को लेकर विवाद हुआ। पढ़ें इस ऐतिहासिक प्रसंग की पूरी कथा। सलेरा कला का इतिहास, महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह, सलेरा कला शिकार प्रसंग, हल्दीघाटी युद्ध, मेवाड़ का इतिहास, Salera Kala History प्रस्तावना राजस्थान की वीर भूमि मेवाड़ का हर कोना किसी न किसी ऐतिहासिक घटना का साक्षी है। सलेरा कला (उदयपुर, मावली तहसील) वही स्थान है जहाँ महान योद्धा महाराणा प्रताप और उनके छोटे भाई शक्तिसिंह के बीच एक शिकार को लेकर विवाद हुआ था। यह घटना केवल मनमुटाव की कहानी नहीं है, बल्कि भाईचारे और त्याग की अमर मिसाल भी है। शिकार का प्रसंग : कहाँ हुआ विवाद? महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह एक दिन शिकार के लिए जंगल में निकले। अचानक एक जंगली जानवर (नीलगाय/सांभर) सामने आया। प्रताप ने अपने अस्त्र से वार किया, उसी क्षण शक्तिसिंह ने भी हमला किया। जानवर प्रताप के वार से गिर पड...

शुभकामनाएं नवरात्रि की

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प्रथम नवरात्रि –  माँ शैलपुत्री भोर की बेला, सजे भक्ति के द्वार, नवरात्रि का आया पावन त्यौहार। पहली रात माँ शैलपुत्री की पूजा, जग में फैले सुख, शांति का दूजा। पर्वतपुत्री, हिमालय की शान, त्रिशूलधारी माँ, सबकी पहचान। नंदी की सवारी, अद्भुत है रूप, भक्तों को देतीं आत्मबल अनूप। माँ के चरणों में जो सिर झुकाए, उसके दुख-संकट सब मिट जाएँ। साधक के जीवन में भर दें प्रकाश, माँ शैलपुत्री करतीं हर उपकार खास। धरती पर जब अन्याय बढ़ जाता, भक्ति से जब विश्वास डगमगाता। तब माँ आतीं अद्भुत अवतार, भक्तों को देतीं नित नया आधार। पहली पूजा से जागे विश्वास, मन में उमंगें, दिल में उल्लास। संकल्प से मिलता जीवन का सार, माँ के बिना जग सूनापन भार। Sanat Sharma भी माँ को बुलाए, भक्ति के दीप हृदय में जलाए। सच्चे मन से जो करता ध्यान, माँ करतीं उसके कर्मों का कल्याण। आओ मिलकर गाएँ गुणगान, शैलपुत्री माता की असीम पहचान। नवरात्रि का ये पहला दिन पावन, करता हर जीवन को सफल और सावन। जय-जय शैलपुत्री जगदंबे माँ, तेरे बिना अधूरा हर रामा। तेरी कृपा से जग होता उज्ज्वल, तेरा आशीष जीवन का संबल। ...

नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

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🌸 नवरात्रि पर्व : शक्ति उपासना का महापर्व 🌸 भारत भूमि त्यौहारों की पावन धरती है। यहाँ हर पर्व समाज में नई ऊर्जा, विश्वास और उत्साह का संचार करता है। नवरात्रि भी ऐसा ही पर्व है जो देवी माँ की आराधना, शक्ति की उपासना और भक्ति का प्रतीक है। नवरात्रि का अर्थ है – नौ रातें, जिनमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में सच्चाई और शक्ति का मार्ग अपनाकर हर अंधकार पर विजय पाई जा सकती है। 🌺 नवरात्रि के मुख्य संदेश - जीवन में शक्ति और साहस का महत्व - बुराई पर अच्छाई की विजय - मातृ शक्ति का सम्मान - भक्ति और साधना से आत्मबल की प्राप्ति ✨ नवरात्रि पर विशेष कविता ✍️ लेखक – Sanat Kumar Sharma सज उठी धरा, महका आकाश, हर दिल में गूंजे माँ का निवास। डोल ताशे की मधुर थाप, भक्ति में डूबा हर एक आप। नव दुर्गा का शुभ आगमन, मिटा दे जीवन का हर व्याकुलपन। शक्ति का स्वरूप, मातृ का मान, माँ के चरणों में है कल्याण। घट स्थापना से दीप जले, मन के अंधियारे क्षण पले। जप-तप, आरती और भजन, भर दे जीवन में शुभ संचन। रंग-बिरंगे गरबा नृत्य, भक्ति में लहराता...

माधवी

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माधवी “सर, हम आ सकतीहैं?” दो छात्राएँ कक्षा कक्ष के मुख्य द्वार पर खड़ी थीं। यह एक की आवाज़ थी। मैंने दूसरी वाली छात्रा से पूछा – “बेटा, आपको प्रवेश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है क्या?” छात्रा की आँखें जमीन की ओर हो गईं और वह बिना कोई उत्तर दिए चुपचाप खड़ी रही। फिर मैंने पूछा – “बेटा, तुम्हारा क्या नाम है?” लड़की फिर भी मौन खड़ी रही, मुँह से एक अक्षर न निकला। मैंने बड़े ही प्रेम से दोनों को उनकी सीट पर बैठने को कहा। वे बैठ गईं। इसी दौरान कक्षा की कुछ लड़कियाँ बोलीं – “सर, इसका नाम माधवी है।” “क्यों? ये क्या नाम हुआ भला?” मैंने पूछा। स्थिति देखकर पता चला कि उसका वास्तविक नाम माधवी है। एक लड़की बोली – “सर, ये किसी से बात नहीं करती और न ही किसी को कोई जवाब देती है, सिर्फ मौन रहती है। इसलिए सब इसे मौनी बच्चा कहते हैं।” तर्क सुनकर मैंने कहा – “इस तरह नाम नहीं बिगाड़ना चाहिए। पूरी कक्षा मौन।” धीरे–धीरे पता चला कि माधवी बहुत ही शान्त, सरल और संकोची लड़की है। कक्षा में हमेशा वूयल और सभी प्रतियोगिताओं में सबसे आगे यही नाम आता है। कुछ दिनों बाद विद्यालय में एक सज्जन मज़दूर आए। माथे प...

पितृ पक्ष अमावस्या श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन

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पितृ अमावस्या 2025: महत्व, तिथि, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएँ पितृ अमावस्या 2025 का महत्व, तिथि, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएँ जानें। सर्वपितृ अमावस्या क्यों विशेष है और इस दिन क्या करें, क्या न करें – विस्तार से पढ़ें। प्रस्तावना भारतीय संस्कृति में पूर्वजों को सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने की परंपरा अनादि काल से रही है। हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृपक्ष मनाया जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या पितृ अमावस्या कहलाता है। यह दिन उन सभी पूर्वजों को समर्पित है जिनका श्राद्ध किसी कारणवश पूरे पखवाड़े में नहीं किया जा सका। ---पितृ अमावस्या 2025 की तिथि तिथि: 29 सितम्बर 2025 (सोमवार) अमावस्या आरंभ: प्रातः 04:21 बजे अमावस्या समाप्त: अगली सुबह 06:15 बजे 👉 ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सूर्योदय काल में तर्पण और श्राद्ध करना अत्यंत शुभ माना गया है। ---पितृ अमावस्या का महत्व 1. पितरों की तृप्ति – इस दिन किया गया तर्पण और दान सीधे पितरों तक पहुँचता है। 2. पितृदोष से म...

जन्मदिन की शुभकामनाएँ मोदी जी

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जन्मदिन की शुभकामनाएँ मोदी जी 🎉 देश का गौरव, भारत का मान, आपसे रोशन हुआ हिंदुस्तान। परिश्रम, तपस्या और बलिदान, आपकी पहचान है सच्चा सम्मान। नवभारत का सपना सजाया, हर दिल में विश्वास जगाया। गरीब, किसान, युवा का सहारा, आपने बनाया भारत को प्यारा। विश्व-पटल पर गूँजे नाम, भारत बढ़े, बढ़े उसका मान। हर जन मन में उमंग जगाएँ, नवयुग की राह हमें दिखाएँ। जन्मदिन पर यही दुआ है, सफलता सदा आपके संग हो। स्वस्थ रहें, दीर्घायु रहें, भारत माँ के सच्चे रंग हो। 🌸🙏 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ 

हिन्दी दिवस विशेष

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हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं मैं हिन्दी हूँ ।। मैं सूरदास की दृष्टि बनी तुलसी हित चिन्मय सृष्टि बनी मैं मीरा के पद की मिठास रसखान के नैनों की उजास मैं हिन्दी हूँ ।। मैं सूर्यकान्त की अनामिका  मैं पन्त की गुंजन पल्लव हूँ मैं हूँ प्रसाद की कामायनी मैं ही कबीरा की हूँ बानी  मैं हिन्दी हूँ ।। खुसरो की इश्क मज़ाजी हूँ मैं घनानंद की हूँ सुजान मैं ही रसखान के रस की खान मैं ही भारतेन्दु का रूप महान मैं हिन्दी हूँ ।। हरिवंश की हूँ मैं मधुशाला ब्रज, अवधी, मगही की हाला अज्ञेय मेरे है भग्नदूत नागार्जुन की हूँ युगधारा  मैं हिन्दी हूँ ।। मैं देव की मधुरिम रस विलास  मैं महादेवी की विरह प्यास मैं ही सुभद्रा का ओज गीत भारत के कण-कण में है वास मैं हिन्दी हूँ ।। मैं विश्व पटल पर मान्य बनी  मैं जगद् गुरु अभिज्ञान बनी मैं भारत माँ की प्राणवायु मैं आर्यावर्त अभिधान बनी मैं हिन्दी हूँ।। मैं आन बान और शान बनूँ मैं राष्ट्र का गौरव मान बनूँ यह दो तुम मुझको वचन आज मैं तुम सबकी पहचान बनूँ मैं हिन्दी हूँ।। हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

पितृ पक्ष

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अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितृ पक्ष के रूप में भी जाना जाता है  इस समय में अपने पूर्वजों के श्राद्ध किया जाता है  पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की मुक्ति होने के साथ नकारात्मकता का अंत भी होता है जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और जीवन में सफलता हासिल होने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है इसलिए इस समय में श्राद्ध कर्म करने की बात कही गई है इस से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल सकती है  अतः इस तरह इस समय श्राद्ध करने की बात कही गई है 

चंद्र ग्रहण 2025: सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि चंद्रमा इस समय राहु के साथ आपकी कुंडली के 11वें भाव में स्थित है और मेष राशि वालों के लिए यह चतुर्थ भाव का स्वामी बन रहा है। इस दौरान आपको विदेश या लंबी दूरी की यात्राओं से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसी यात्राओं में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। चंद्रमा और राहु का 11वें भाव में होना आपके वैवाहिक जीवन और घर-परिवार की छवि पर असर डाल सकता है। इस समय विवाहेतर संबंध बनने की संभावना भी रहती है। वित्तीय दृष्टि से भी यह समय अनुकूल नहीं है। धन की बचत करने में कठिनाई आ सकती है और खर्च बढ़ सकते हैं। चंद्रमा-राहु का यह योग भौतिक सुख-सुविधाओं, दूसरों से प्रशंसा पाने या किसी प्रकार की संतुष्टि की तीव्र इच्छा पैदा कर सकता है, जिसके चलते लत या आदतों पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। उपाय: सकारात्मकता लाने के लिए भगवान शिव की पूजा करें वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए चंद्रमा इस समय तीसरे भाव के स्वामी हैं और वर्तमान में यह आपकी कुंडली के दसवें भाव में स्थित है। दसवें भाव में राहु के साथ चंद्रमा की युति होना आपके सामाजिक जीवन, रिश्तों और विवाह की संभावनाओं पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। र...

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 2025: जानें, आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आएगा

जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसी घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। यह एक दुर्लभ और बेहद खूबसूरत खगोलीय घटना है, जिसे देखना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव होता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसकी गहराई में जाने से पहले, आइए सबसे पहले इस अद्भुत घटना के असली स्वरूप को समझते हैं। चंद्र ग्रहण 2025: ज्योतिषीय महत्व चंद्र ग्रहण, जिसे वैदिक ज्योतिष में चंद्र ग्रहण कहा जाता है, एक शक्तिशाली खगोलीय घटना मानी जाती है। माना जाता है कि यह गहरे भावनात्मक बदलाव, आध्यात्मिक जागृति और कर्मों की शुद्धि लाता है। यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाता है और पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण का कारण राहु और केतु नामक छाया ग्रह होते हैं। ये ग्रह हमारे भीतर छिपी हुई ऊर्जा को सक्रिय करते हैं, अधूरे कर्मों को सामने लाते हैं और जीवन में अचानक बदलाव की स्थितियां पैदा कर सकते हैं इसलिए चंद्र ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक और कर्म संबंधी संकेत भी माना जाता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण और इसका...

अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं

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गणेश उत्सव का आयोजन के अंतिम दिन को अनंत चतुर्दशी के रूप मे मनाया जाता है  गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित गणेश मूर्ति का इस दिन विसर्जन किया जाता है  आज के समय में गणेश उत्सव हर गांव गली मोहल्ले में मनाया जाता है और गणेश मूर्ति की स्थापना की जाती हैं  लेकिन 10 दिन बाद इस मूर्ति का विसर्जन कहीं भी किसी भी पानी में कर रहे हैं जो न केवल गणेश जी का अपमान है यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक नहीं है   अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आप सभी से निवेदन है कि मिट्टी की गणेश मूर्ति  ही स्थापित करने और पवित्र जल क्षेत्र में ही सम्मान के साथ इस प्रकार विसर्जन करे कि मूर्ति पानी में घुल कर वापस मिट्टी बन जाए मूर्ति का कोई भी अंश जल के किनारे पर ना दिखाई दे जिस से मूर्ति का अपमान नहीं हो।  Sanat sharma 

TEACHER DAY

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शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं  शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं  भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है  डाक्टर राधाकृष्णन जी एक शिक्षक के रूप में कार्य किया। उसके बाद भारत के  राष्ट्रपति  बने।  श्री राधाकृष्णन जी के शब्दों में,,,,,, "शिक्षक वह नहीं जो छात्रो के दिमाग़ मे तथ्यो को जबरन ठूंसे, बल्कि शिक्षक वह है जो उसे आने वाली कल की चुनौती के लिए तैयार करे। "          --------------मै शिक्षक हूँ ---------------- सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ  नौ सिखिये परिन्दें को बाज बनाता हूँ  चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी,  दुनिया बदलने की आवाज़ बनाता हूँ  समन्दर तो परखता है हौसले पक्षियो के  मै डूबतीज कश्ती को जहाज बनाता हूँ  बनाएँ चाहे कोई चाँद पर खुबसूरत इमारत,  मैं तो कच्ची मिट्टी को इंसान बनाता हूँ। । ✒✒✒✒✒✒✒✒✒✒✒✒✒           ✍ सनत कुमार शर्मा ✍

जल झूलन एकादशी

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🪷 जल झूलनी एकादशी🪷 🚩चारभुजा मन्दिर, गढबोर (राजसमंद ) 🚩   🌸चारभुजा एक ऐतिहासिक एवं प्राचीन हिन्दू मन्दिर है जो भारत के राजस्थान राज्य में  राजसमंद ज़िले की कुम्भलगढ़ तहसील के गढब़ोर गांव में स्थित है। उदयपुर से 112 और कुम्भलगढ़ से 32 कि.मी. की दूरी के लिए मेवाड़ का जाना – माना तीर्थ स्थल हैं, जहां चारभुजा जी की बड़ी ही पौराणिक चमत्कारी प्रतिमा हैं। मेवाड़ के  एकलिंगनाथ मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर, द्धारिकाधीश मंदिर व चारभुजानाथ मंदिर सुप्रसिद्ध है। 🌸पौराणिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण भगवान ने उद्धव को हिमालय में तपस्या कर सद्गति प्राप्त करने का आदेश देते हुए स्वयं गौलोक जाने की इच्छा जाहिर की, तब उद्धव ने कहाकि मेरा तो उद्धार हो जाएगा पंरतु आपके परमभक्त पांडव व सुदामा तो आपके गौलोक जाने की खबर सुनकर प्राण त्याग देंगे। ऐसे में श्रीकृष्ण ने विश्वकर्मा से स्वयं व बलराम की मूर्तियां बनवाई, जिसे राजा इन्द्र को देकर कहा कि ये मूर्तियां पांडव युधिष्ठिर व सुदामा को सुपुर्द करके उन्हें कहना कि ये दोनों मूर्तियां मेरी है और मैं ही इनमें हूं। प्रेम से इन मूर्तियों का प...

लोक देवता तेजा की जानकारी

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तेजाजी महाराज, जिन्हें वीर तेजाजी के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान, भारत के 11वीं शताब्दी के लोक देवता और योद्धा थे । उन्हें एक देवता, सर्पदंश से बचाने वाले तथा एक नायक के रूप में पूजा जाता है, जो अपनी प्रतिज्ञाओं के लिए मर गए, विशेष रूप से गायों को बचाते हुए तथा एक सर्प को दिए गए वचन को पूरा करते हुए। उन्हें राजस्थान और उत्तरी भारत के अन्य भागों में सत्य, निष्ठा और सामाजिक सुधार के प्रतीक के रूप में व्यापक रूप से पूजा जाता है।   मुख्य पहलू पहचान: राजस्थान के एक लोक देवता और योद्धा, जिन्हें वीर तेजा के नाम से भी जाना जाता है ।   जन्मस्थान: उनका जन्म राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ था।   पूजा करना: राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात में देवता के रूप में पूजा जाता है।   त्याग करना: उन्हें उनकी बहादुरी और गायों की रक्षा के लिए उनके बलिदान के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से लच्छा गुर्जरी नामक एक स्थानीय महिला की गायों को बचाने के लिए।   दिव्य संबंध: उन्हें भगवान शिव के ग्यारह प्राथमिक अवतारों में से ...

- _शिक्षा हित में शिक्षक_ - _शिक्षक हित में समाज_

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_आइए राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के ध्येय वाक्य को समझते हैं_  - _राष्ट्रहित में शिक्षा_  - _शिक्षा हित में शिक्षक_  - _शिक्षक हित में समाज_  *राष्ट्रहित में शिक्षा* राष्ट्रहित में शिक्षा का अर्थ है कि शिक्षा प्रणाली को इस तरह से डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि वह राष्ट्र के विकास और प्रगति में योगदान करे। इसमें शामिल हैं: - *नागरिकों का निर्माण*: शिक्षा प्रणाली को ऐसे नागरिकों का निर्माण करना चाहिए जो राष्ट्र के विकास में योगदान कर सकें। - *राष्ट्रीय मूल्यों का प्रसार*: शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय मूल्यों जैसे कि लोकतंत्र, समानता और न्याय को बढ़ावा देना चाहिए। - *आर्थिक विकास*: शिक्षा प्रणाली को ऐसे कौशल और ज्ञान प्रदान करना चाहिए जो आर्थिक विकास में योगदान कर सकें। *शिक्षा हित में शिक्षक* शिक्षा हित में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें शामिल हैं: - *ज्ञान और कौशल का प्रसार*: शिक्षकों को विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल प्रदान करना चाहिए जो उनके भविष्य के लिए उपयोगी हों। - *विद्यार्थियों का मार्गदर्शन*: शिक्षकों को विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करन...

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नई जानकारी राष्ट्रहित में शिक्षा, शिक्षा हित में शिक्षक, शिक्षक हित में समाज, यही है जीवन का लक्ष्य। ज्ञान का दीप जले, हर घर में उजियारा हो, अज्ञान का तिमिर मिटे, हर मन में सहारा हो। शिक्षा की किरणें जब हर दिशा में फैलेंगी, तब राष्ट्र की नींव सच में मजबूत बनेंगी। शिक्षा ही वो नींव है, जिस पर राष्ट्र खड़ा है, बिना इसके हर सपना अधूरा पड़ा है। शिक्षक ही वो माली है, जो इसे सींचता है, अपने ज्ञान से हर शिष्य को नया जीवन देता है। जब शिक्षक का मान बढ़ेगा, समाज सुधरेगा, उसके सम्मान में ही, राष्ट्र आगे बढ़ेगा। शिक्षक को जब मिलेगा वो स्थान जो वो चाहे, वो भी हर शिष्य के लिए एक नई राह बनाए। इसलिए आओ, हम सब मिलकर ये प्रण उठाएं, शिक्षा, शिक्षक और समाज को एक सूत्र में पिरोएं। राष्ट्र का हित शिक्षा में, शिक्षा का हित शिक्षक में, और शिक्षक का हित समाज में, ये ही है जीवन का मर्म। यही है वो त्रिवेणी, जो जीवन को सजाती है, यही है वो शक्ति, जो राष्ट्र को उन्नति दिलाती है।