पितृ पक्ष अमावस्या श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन
पितृ अमावस्या 2025: महत्व, तिथि, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएँ
पितृ अमावस्या 2025 का महत्व, तिथि, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएँ जानें। सर्वपितृ अमावस्या क्यों विशेष है और इस दिन क्या करें, क्या न करें – विस्तार से पढ़ें।
प्रस्तावना
भारतीय संस्कृति में पूर्वजों को सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने की परंपरा अनादि काल से रही है। हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृपक्ष मनाया जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या पितृ अमावस्या कहलाता है। यह दिन उन सभी पूर्वजों को समर्पित है जिनका श्राद्ध किसी कारणवश पूरे पखवाड़े में नहीं किया जा सका।
---पितृ अमावस्या 2025 की तिथि
तिथि: 29 सितम्बर 2025 (सोमवार)
अमावस्या आरंभ: प्रातः 04:21 बजे
अमावस्या समाप्त: अगली सुबह 06:15 बजे
👉 ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन सूर्योदय काल में तर्पण और श्राद्ध करना अत्यंत शुभ माना गया है।
---पितृ अमावस्या का महत्व
1. पितरों की तृप्ति – इस दिन किया गया तर्पण और दान सीधे पितरों तक पहुँचता है।
2. पितृदोष से मुक्ति – धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए कर्मों से पितृदोष का निवारण होता है।
3. कुल की समृद्धि – पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख, शांति और उन्नति आती है।
4. अपूर्ण श्राद्ध की पूर्ति – जिनका श्राद्ध किसी कारणवश पितृपक्ष में छूट जाए, उनका स्मरण इस दिन करने से भी उन्हें संतोष मिलता है।
---पितृ अमावस्या पर पूजन विधि
1. तर्पण
स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें।
किसी नदी, तालाब या कुएँ में जल, तिल और कुश अर्पित करें।
पितरों के नाम का स्मरण कर तर्पण करें।
2. पिंडदान
आटे, तिल, चावल और जौ से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें।
यह कार्य पंडित या योग्य ब्राह्मण की उपस्थिति में करना अधिक शुभ माना जाता है।
3. दान-पुण्य
अन्न, वस्त्र, दक्षिणा और भोजन का दान करें।
गौ-सेवा और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस दिन विशेष पुण्यकारी है।
---इस दिन क्या करें?
✔ पितरों के नाम से दीपक जलाएँ।
✔ गरीब और ब्राह्मण को भोजन कराएँ।
✔ पूर्वजों का स्मरण कर परिवार की उन्नति के लिए संकल्प लें।
---इस दिन क्या न करें?
❌ मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
❌ किसी का अपमान, झूठ और क्रोध न करें।
❌ पेड़-पौधों को न काटें और अनावश्यक घर की सफाई या नवीनीकरण न करें।
---धार्मिक मान्यताएँ
गरुड़ पुराण और महाभारत में पितृ अमावस्या का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
मान्यता है कि पितरों की आत्मा इस दिन धरती पर आती है और अपने वंशजों के श्राद्ध से तृप्त होकर उन्हें आशीर्वाद देती है।
ऐसा भी कहा जाता है कि जो लोग पितृ अमावस्या पर श्राद्ध करते हैं, उन्हें 100 यज्ञों का फल मिलता है।
---आधुनिक परिप्रेक्ष्य
आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। लेकिन पितृ अमावस्या हमें यह याद दिलाती है कि हम अपनी जड़ों और वंश परंपरा से जुड़े हैं। पितरों का सम्मान सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि कृतज्ञता और संस्कार का प्रतीक है।
---निष्कर्ष
पितृ अमावस्या केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों को स्मरण करने का विशेष अवसर है। यह दिन हमें जीवन में श्रद्धा, कृतज्ञता और संस्कार का महत्व सिखाता है। पितरों का आशीर्वाद ही हमारे परिवार की उन्नति और समृद्धि का आधार है।
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