सलेरा कला का इतिहास
सलेरा कला का इतिहास : महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह का शिकार प्रसंग
सलेरा कला का इतिहास : महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह का शिकार प्रसंग | Mewar History
सलेरा कला राजस्थान का वह स्थान है जहाँ महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह में शिकार को लेकर विवाद हुआ। पढ़ें इस ऐतिहासिक प्रसंग की पूरी कथा।
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प्रस्तावना
राजस्थान की वीर भूमि मेवाड़ का हर कोना किसी न किसी ऐतिहासिक घटना का साक्षी है। सलेरा कला (उदयपुर, मावली तहसील) वही स्थान है जहाँ महान योद्धा महाराणा प्रताप और उनके छोटे भाई शक्तिसिंह के बीच एक शिकार को लेकर विवाद हुआ था। यह घटना केवल मनमुटाव की कहानी नहीं है, बल्कि भाईचारे और त्याग की अमर मिसाल भी है।
शिकार का प्रसंग : कहाँ हुआ विवाद?
महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह एक दिन शिकार के लिए जंगल में निकले। अचानक एक जंगली जानवर (नीलगाय/सांभर) सामने आया। प्रताप ने अपने अस्त्र से वार किया, उसी क्षण शक्तिसिंह ने भी हमला किया। जानवर प्रताप के वार से गिर पड़ा, लेकिन शक्तिसिंह ने दावा किया कि शिकार उन्होंने किया। यहीं से भाइयों के बीच मनमुटाव की शुरुआत हुई। 👉 यह विवाद सलेरा कला की धरती पर हुआ था।
मनमुटाव और दूरियाँ
सम्मान और अहंकार ने छोटे विवाद को बड़ा बना दिया। शक्तिसिंह को लगा कि प्रताप उनकी वीरता का सम्मान नहीं कर रहे। क्रोधित होकर उन्होंने प्रताप से कटु वचन कहे और वहाँ से चले गए। कुछ समय बाद शक्तिसिंह अकबर के दरबार पहुँच गए और मुग़लों के साथ रहने लगे।
हल्दीघाटी युद्ध के बाद भाईचारे की जीत
1576 ई. में प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध लड़ा गया। युद्ध में महाराणा प्रताप मुग़ल सेना से घिर गए और उनका प्रिय घोड़ा चेतक शहीद हो गया। उसी समय शक्तिसिंह को अपने भाई की दशा का आभास हुआ। उन्होंने अकबर का साथ छोड़कर प्रताप को अपना घोड़ा दिया और उनकी जान बचाई। 👉 इस प्रकार, सलेरा कला का मनमुटाव भाईचारे और वतन-निष्ठा में बदल गया।
सलेरा कला का ऐतिहासिक महत्व
आज सलेरा कला सिर्फ़ एक गाँव नहीं, बल्कि इतिहास
का साक्षी है।
- यह स्थान भाईयों के बीच हुए मतभेद की याद दिलाता है।
- साथ ही यह दर्शाता है कि रक्त का रिश्ता और मातृभूमि के प्रति निष्ठा सबसे ऊपर होती
है।
- मेवाड़ का इतिहास केवल युद्धों और बलिदानों का ही नहीं, बल्कि भाईचारे और त्याग का
भी इतिहास है।
निष्कर्ष
सलेरा कला की यह घटना हमें यह सिखाती है कि—
- रिश्तों में छोटे विवाद भी दूरियाँ पैदा कर सकते हैं।
- लेकिन प्रेम, कर्तव्य और वतन की सेवा सब मतभेदों को मिटा देती है।
- महाराणा प्रताप और शक्तिसिंह का प्रसंग भारतीय इतिहास में भाईचारे और स्वाभिमान की
अद्वितीय मिसाल है।
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