मेवाड़ के इतिहास में salerakala

​महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह: एक शिकार से शुरू हुआ विवाद और हल्दीघाटी में भाई का प्यार
​- सनत शर्मा
​मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम साहस, शौर्य और त्याग का पर्याय है। लेकिन उनके जीवन की कहानी सिर्फ युद्धों और संघर्षों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें पारिवारिक रिश्ते और मनमुटाव भी शामिल थे। उनके भाई शक्ति सिंह के साथ उनका रिश्ता काफी जटिल था, जिसकी नींव एक साधारण शिकार की घटना से पड़ी थी।
​सालेरा कलां: जब एक शिकार ने दो भाइयों में दरार पैदा की
​महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह दोनों को बचपन से ही शिकार का शौक था। एक दिन, वे दोनों सालेरा कलां नामक गाँव के पास शिकार के लिए निकले। उन्हें एक सूअर दिखाई दिया, और दोनों ने एक साथ उस पर भाला मारा। सूअर वहीं गिर गया।
​अब विवाद छिड़ गया। दोनों का दावा था कि उनका भाला सबसे पहले लगा था। यह सिर्फ एक शिकार का विवाद नहीं था, बल्कि यह दोनों के बीच मौजूद गहरे मतभेद और उत्तराधिकार के संघर्ष को दर्शाता था। महाराणा प्रताप ने इसे अपने सम्मान पर लिया और क्रोध में आकर शक्ति सिंह को मेवाड़ से बाहर निकाल दिया।
​अपमानित होकर शक्ति सिंह मुग़ल सम्राट अकबर के दरबार में चले गए और उनसे जा मिले। उन्होंने अकबर को मेवाड़ की कमजोरियों और महाराणा प्रताप की रणनीतियों की जानकारी दी। इस घटना के बाद, ऐसा लगा कि दो भाइयों के बीच का रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
​हल्दीघाटी: जब भाई का प्यार अहंकार पर भारी पड़ा
​लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब हल्दीघाटी का युद्ध हुआ, तब शक्ति सिंह अकबर की सेना की तरफ से अपने भाई के खिलाफ लड़ रहे थे। युद्ध के दौरान, जब महाराणा प्रताप बुरी तरह घायल हो गए और दो मुग़ल सैनिक उनका पीछा करने लगे, तब शक्ति सिंह से रहा नहीं गया। उन्होंने अपने पारिवारिक रिश्ते को दुश्मनी से ऊपर रखा। उन्होंने मुग़ल सैनिकों को मारकर अपने भाई की जान बचाई।
​इस घटना के बाद, दोनों भाइयों ने अपने मतभेदों को भुला दिया। यह एक शिकार से शुरू हुए विवाद का ऐसा अंत था, जहाँ खून का रिश्ता हर अहंकार और संघर्ष पर भारी पड़ा। यह कहानी हमें सिखाती है कि परिवार और प्रेम की जड़ें कितनी गहरी होती हैं, जो बड़े से बड़े विवादों के बाद भी अटूट बनी रहती हैं

Comments

Popular posts from this blog

सलेरा कला का इतिहास

भोले के चमत्कार

भारतीय संस्कृति