शुभकामनाएं नवरात्रि की

प्रथम नवरात्रि –
 माँ शैलपुत्री
भोर की बेला, सजे भक्ति के द्वार,
नवरात्रि का आया पावन त्यौहार।
पहली रात माँ शैलपुत्री की पूजा,
जग में फैले सुख, शांति का दूजा।
पर्वतपुत्री, हिमालय की शान,
त्रिशूलधारी माँ, सबकी पहचान।
नंदी की सवारी, अद्भुत है रूप,
भक्तों को देतीं आत्मबल अनूप।
माँ के चरणों में जो सिर झुकाए,
उसके दुख-संकट सब मिट जाएँ।
साधक के जीवन में भर दें प्रकाश,
माँ शैलपुत्री करतीं हर उपकार खास।
धरती पर जब अन्याय बढ़ जाता,
भक्ति से जब विश्वास डगमगाता।
तब माँ आतीं अद्भुत अवतार,
भक्तों को देतीं नित नया आधार।
पहली पूजा से जागे विश्वास,
मन में उमंगें, दिल में उल्लास।
संकल्प से मिलता जीवन का सार,
माँ के बिना जग सूनापन भार।
Sanat Sharma भी माँ को बुलाए,
भक्ति के दीप हृदय में जलाए।
सच्चे मन से जो करता ध्यान,
माँ करतीं उसके कर्मों का कल्याण।
आओ मिलकर गाएँ गुणगान,
शैलपुत्री माता की असीम पहचान।
नवरात्रि का ये पहला दिन पावन,
करता हर जीवन को सफल और सावन।
जय-जय शैलपुत्री जगदंबे माँ,
तेरे बिना अधूरा हर रामा।
तेरी कृपा से जग होता उज्ज्वल,
तेरा आशीष जीवन का संबल।
🌺 जय माता दी! 🌺

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