शाहपुरा री गाथा
🎶 शाहपुरा री गाथा 🎶
शाहपुरा री धरती पावन, मेवाड़ रो गौरव गावे,
इतिहास री परछाई सूं, संस्कृति रो दीप जगावे।
🎵 ओ रे शाहपुरा, ओ रे माटी री शान,
भक्ति औ वीरता री, अमर थारी पहचान। 🎵
रामद्वारा मंदिर री गूँज, भक्ति रस री धारा,
संतां री तपस्या सूं, जगमग थारो नजारा।
रामस्नेही संतां री, छाप अमर संसार,
भक्तां रो सहारा बन्यो, थारो पावन द्वार।
चित्रकला री छटा न्यारी, रंगां री बरसात,
दीवारां पर जीवंत थाए, कथा-पुराण री बात।
शाहपुरा रो रंग अनूठो, कला री धरोहर,
दुनिया भर में गूंजे नाम, थारी छवि अमर।
वीर ठिकाना राजपूतानो, रण बीच थयो बलवान,
मुगलां सूं टकराई धरती, रख्यो मेवाड़ रो मान।
खून-पसीना अर्पण कियो, धरती रो गौरव गान,
वीरां री लहू सूं लिख्यो, अमर गाथा रो प्रमाण।
त्यौहारां में रंग झलकतो, लोकगीतां री तान,
ढोल-नगारां सूं गूँजतो, राजस्थानी गान।
नाच-गान औ मेलां री, रीत पुरानी थारो,
संस्कारां री थाली में, मान-सम्मान थारो।
ओ शाहपुरा री धरती, तू संस्कृति री खान,
भक्ति औ वीरता सूं, जग में करसी पहचान।
लेखक Sanat Sharma गावे, थारो अमर गान,
जनम-जनम तक गूँजे, शाहपुरा री शान। 🎵
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