लोक देवता तेजा की जानकारी

तेजाजी महाराज, जिन्हें वीर तेजाजी के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान, भारत के 11वीं शताब्दी के लोक देवता और योद्धा थे । उन्हें एक देवता, सर्पदंश से बचाने वाले तथा एक नायक के रूप में पूजा जाता है, जो अपनी प्रतिज्ञाओं के लिए मर गए, विशेष रूप से गायों को बचाते हुए तथा एक सर्प को दिए गए वचन को पूरा करते हुए। उन्हें राजस्थान और उत्तरी भारत के अन्य भागों में सत्य, निष्ठा और सामाजिक सुधार के प्रतीक के रूप में व्यापक रूप से पूजा जाता है।
 
मुख्य पहलू
पहचान: राजस्थान के एक लोक देवता और योद्धा, जिन्हें वीर तेजा के नाम से भी जाना जाता है ।  
जन्मस्थान: उनका जन्म राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ था।  
पूजा करना: राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात में देवता के रूप में पूजा जाता है।  
त्याग करना: उन्हें उनकी बहादुरी और गायों की रक्षा के लिए उनके बलिदान के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से लच्छा गुर्जरी नामक एक स्थानीय महिला की गायों को बचाने के लिए।  
दिव्य संबंध: उन्हें भगवान शिव के ग्यारह प्राथमिक अवतारों में से एक माना जाता है ।  
प्रतीकवाद: वह ईमानदारी, सच्चाई और अपने वादों को निभाने के महत्व का प्रतिनिधित्व करता है।  
तेजाजी पशु मेला : नागौर के निकट परसा गांव में उनके नाम पर एक वार्षिक पशु मेला आयोजित किया जाता है।  

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