सलेरा कला री गाथा

🎶 सलेरा कला री गाथा 🎶

(धुन: मेवाड़ी लोकगीत की तरह पढ़ें)

सलेरा कला री धरती, अमर गाथा गावे,
महाराणा औ शक्तिसिंह, इतिहास उजियावे।
🎵 ओ रणबाँकुरा, ओ मेवाड़ रा लाल,
धरती रा आँचल में, थारो नाम अमरकाल। 🎵

जंगल बीच हिरण दौड़तो, शिकार री आहट आई,
भाई-भाई री आँखां में, आग औ मान समाई।
🎵 ओ रे रणधीर, ओ रे महाराणा,
सच्चो मेवाड़ री शान, थारो ही तराना। 🎵

शक्तिसिंह कहे रोक राणा, भुल कर रा गुस्सां,
पर राणा री तलवार बोले, थर्र्या धरती रसां।
🎵 ओ रे धरती माँ, साक्षी थारी थान,
भाईचारा रो रंग, थयो अमर पहचान। 🎵

इतिहास लिख्यो सोने री कलम, धरती गुनगान करे,
मेवाड़ री माटी आजो, वीरां रो गुण गावे।
🎵 ओ रे शौर्य रा गीत, ओ रे मेवाड़ री शान,
जनम-जनम तक गूँजे, वीरता रो गान। 🎵

सलेरा कला री गाथा, लोकगाथा बन गी,
वीर राणा औ शक्तिसिंह, अमर ज्योत जगदी।
🎵 ओ वीर राजपूताना, ओ रणबाँकुरा वीर,
धरती रो मान थारा, अमर रहसी नीर। 🎵

अंत में प्रणाम करूँ, भाव भरा मनुहार,
लेखक Sanat Sharma गावे, मेवाड़ रो श्रृंगार।
🎵 ओ रे अमर गाथा, ओ रे वीरां री शान,
मेवाड़ री माटी सूं, अमर रहसी थारो नाम। 🎵


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