शाहपुरा री लोक-गाथा
🎵 शाहपुरा री लोक-गाथा 🎵
(ढोल-नगारों, मांड-सरंगी की लय पर पढ़ें)
शाहपुरा री धरती रा, गुण गावे सब गाम,
भक्ति औ वीरता रा, जग में छाए नाम।
🎶 ओ हो... शाहपुरा री शान,
मेवाड़ री पहचान। 🎶
रामद्वारा मंदिर रो, गूँजे भक्ति-सुर,
रामस्नेही संतां रो, अमर भयो हुंकार।
🎶 ओ हो... राम नाम री गूँज,
शाहपुरा री पूँज। 🎶
चित्रकला री बाड़ी में, रंगां रो बरसाव,
भित्ति चित्रां री छटा, देखे दिल हरखाव।
🎶 ओ हो... रंग-रंगीलो गाव,
शाहपुरा रो चाव। 🎶
रण बीच राजपूताना, खड़ग उठायो हाथ,
मुगलां सूं टकराई धरती, राख्यो आन औ बात।
🎶 ओ हो... रणबाँकुरो वीर,
शाहपुरा रो धीर। 🎶
ढोल-नगारां गूँजया, त्यौहारां री रात,
लोकगीतां री तान सूं, झूमे हर इक जात।
🎶 ओ हो... गूंजे राजस्थानी,
शाहपुरा रो पानी। 🎶
लेखक Sanat Sharma गावे, सुर में मीठो तान,
शाहपुरा री धरती सूं, अमर रहसी पहचान।
🎶 ओ हो... गाथा अमर सुजान,
शाहपुरा रो गान। 🎶
👉 Sanat Kumar Sharma
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