नवरात्रि विशेष,,,माँ चंद्रघंटा की स्तुति
माँ चंद्रघंटा पर कविता ✍️
(Sanat Sharma)
सिंह पर आरूढ़ विराजे, स्वर्णिम ज्योति से भरी,
दस भुजाओं में शस्त्र सजें, माँ की छवि है अति धरी।
माथे पर शोभित अर्धचंद्र, रूप अलौकिक प्यारा,
घंटनाद से कांपे जग, मिटे अंधियारा सारा।
भय का नाश, साहस की दात्री, शांति का देती वरदान,
माँ चंद्रघंटा की उपासना से, पाते श्रद्धालु सम्मान।
घंटि की ध्वनि से दूर हो, जीवन का हर संकट,
माँ के चरणों में जो झुके, उसको मिले आनंद।
नवरात्रि का तीसरा दिन है, भक्तों का उत्सव न्यारा,
माँ की कृपा से जग में, होता मंगल सारा।
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