राजस्थान की वनस्पति 2nd gred exam

राजस्थान की वानस्पतिक संरचना – Study Material Notes
✍️ लेखक: Sanat Sharma
1. परिचय
• राजस्थान का लगभग 9.57% क्षेत्र ही वनाच्छादित है (राष्ट्रीय औसत ~21%)।
• यहाँ की वनस्पति मुख्यतः जलवायु, वर्षा, मिट्टी व मानव हस्तक्षेप पर निर्भर करती है।
2. वनस्पति को प्रभावित करने वाले कारक
• जलवायु व वर्षा → पश्चिम में शुष्क, दक्षिण-पूर्व में अधिक वर्षा।
• मिट्टी की प्रकृति → बालुई मिट्टी में झाड़ियाँ, काली मिट्टी में कृषि पौधे।
• मानव हस्तक्षेप → चराई, खनन व शहरीकरण।
3. मुख्य वानस्पतिक क्षेत्र
क) मरुस्थलीय वनस्पति (Desert Vegetation)
• क्षेत्र: जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर।
• पौधे: काँटेदार झाड़ियाँ, बेर, कीकर, खेजड़ी, थोर, आक।
• घास: सेवण, धामण, मुंज → ऊँट/पशु चारा।
ख) शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous)
• क्षेत्र: अजमेर, पाली, नागौर, टोंक।
• वृक्ष: ढाक (धौरा), बबूल, सालर, नीम, खैर।
ग) आर्द्र पर्णपाती वन (Moist Deciduous)
• क्षेत्र: उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, झालावाड़।
• वृक्ष: टीक (सागौन), महुआ, आम, बांस, जामुन।
घ) पर्वतीय/उपोष्ण कटिबंधीय वन (Subtropical Hill)
• क्षेत्र: अरावली, माउंट आबू।
• वृक्ष: चीड़, देवदार, गुलमोहर, जामुन।
4. विशेष वनस्पति
• खेजड़ी → राज्य वृक्ष, मरुस्थल का जीवनदाता।
• रोहिड़ा → राज्य पुष्प, शुष्क प्रदेशों में सुंदर फूल।
• गुग्गल, अजमोद, अजवाइन → औषधीय पौधे।
• कुम्हारिया → औषधीय महत्व।
5. संरक्षण प्रयास
• वन महोत्सव, हरित राजस्थान योजना → वृक्षारोपण।
• राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य → रणथम्भौर, सरिस्का, डेजर्ट पार्क, कुंभलगढ़।
• बिश्नोई समाज → पेड़ व वन्यजीव संरक्षण।
6. निष्कर्ष
राजस्थान की वनस्पति विविध है – पश्चिम में मरुस्थलीय झाड़ियाँ, दक्षिण में आर्द्र वन और अरावली में घनी हरियाली। यह न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखती है बल्कि पशुपालन, कृषि और औषधीय महत्व में भी सहायक है।

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